
टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने का सबसे सुरक्षित तरीका है संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, 7 से 9 घंटे की नींद, कम तनाव और शराब से दूरी। स्टेरॉयड या बिना जांचे सप्लीमेंट न लें। अगर थकान, सेक्स में रुचि की कमी या इरेक्शन की दिक्कत बनी रहे, तो पहले ब्लड टेस्ट कराएं और डॉक्टर की सलाह से ही इलाज शुरू करें।
इस लेख में डॉक्टर की नज़र से जानिए कि क्या करना सही है, क्या करना खतरनाक है, और टेस्टोस्टेरोन कम होने के लक्षण कैसे पहचानें। अगर आप बड़े सवाल से शुरू करना चाहते हैं कि गुप्त रोग की जड़ क्या होती है, तो गुप्त रोग के कारण और इलाज की पूरी गाइड पढ़ें।
टेस्टोस्टेरोन क्या है और कम होने पर क्या होता है?
टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) पुरुषों का मुख्य हार्मोन है। यह सेक्स की इच्छा, मांसपेशियों, हड्डियों की मजबूती और एनर्जी में बड़ी भूमिका निभाता है।
उम्र के साथ इसका स्तर धीरे-धीरे कम होता है। पर खराब लाइफस्टाइल कम उम्र में भी इसे घटा सकती है। कम टेस्टोस्टेरोन के आम संकेत:
- सेक्स में रुचि कम होना (Low Libido)
- इरेक्शन में दिक्कत
- लगातार थकान और कमज़ोरी
- मूड खराब रहना, चिड़चिड़ापन
- पेट के आसपास चर्बी बढ़ना, मांसपेशियां घटना
ये लक्षण और कारणों से भी हो सकते हैं, जैसे डायबिटीज़, थायरॉइड, नींद की कमी या तनाव। इसलिए सिर्फ लक्षण देखकर खुद दवा शुरू न करें।
टेस्टोस्टेरोन कम क्यों होता है?
ज़्यादातर पुरुषों में असली वजह रोज़ की आदतों में छिपी होती है:
- मोटापा, खासकर पेट की चर्बी
- नींद पूरी न होना
- लगातार तनाव
- ज़्यादा शराब, सिगरेट या गुटखा
- व्यायाम की कमी और ज़्यादा चीनी वाला खाना
- डायबिटीज़, थायरॉइड जैसी बीमारियां या कुछ दवाएं
सही कारण पहचानकर इलाज संभव है; नतीजे कारण और व्यक्ति पर निर्भर करते हैं।
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टेस्टोस्टेरोन लेवल कैसे पता करें? कब कराएं टेस्ट
टेस्टोस्टेरोन एक साधारण ब्लड टेस्ट से पता चलता है। यह आमतौर पर सुबह के समय कराया जाता है, क्योंकि सुबह हार्मोन का स्तर सबसे ज़्यादा होता है। कई बार डॉक्टर पक्का करने के लिए टेस्ट दोबारा कराते हैं।
टेस्ट कब कराएं:
- सेक्स में रुचि कई हफ्तों से कम हो
- इरेक्शन की दिक्कत बार-बार हो
- बिना वजह थकान, मूड में बदलाव या मांसपेशियां घट रही हों
रिपोर्ट को खुद पढ़कर फैसला न करें। नॉर्मल रेंज लैब और उम्र के हिसाब से अलग होती है, इसलिए रिपोर्ट डॉक्टर को दिखाएं।
टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के लिए क्या न करें?
स्टेरॉयड बिलकुल न लें

एनाबॉलिक स्टेरॉयड टेस्टोस्टेरोन के सिंथेटिक रूप हैं। जल्दी मसल्स बनाने या सेक्स परफॉर्मेंस के लिए लोग इन्हें बिना डॉक्टर के लेते हैं।
इनके गलत इस्तेमाल से लिवर को नुकसान, दिल की समस्याएं और मानसिक परेशानी जैसे गंभीर खतरे हो सकते हैं। स्टेरॉयड वाले कैप्सूल भी उतने ही खतरनाक हो सकते हैं।
टेस्टोस्टेरोन इंजेक्शन: कब ठीक, कब खतरनाक?

टेस्टोस्टेरोन इंजेक्शन या थेरेपी सिर्फ तब दी जाती है जब टेस्ट से कमी पक्की हो और डॉक्टर को यह ज़रूरी लगे। यह सिर्फ डॉक्टर की निगरानी में, नियमित जांच के साथ ही ली जाती है।
बिना जांच और सलाह के लेने पर हार्मोन का संतुलन बिगड़ सकता है, स्पर्म कम हो सकते हैं और दूसरी दिक्कतें आ सकती हैं। याद रखें, ज़्यादातर पुरुषों को इंजेक्शन की ज़रूरत नहीं पड़ती।
अप्रमाणित सप्लीमेंट्स न लें

क्रिएटिन (Creatine) जैसे कई सप्लीमेंट टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने का दावा करते हैं, लेकिन इसका मज़बूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के लिए इन पर भरोसा न करें।
लोग ऐसे प्रोडक्ट्स पर बहुत पैसा खर्च करते हैं। कई बार ये वादे के मुताबिक काम नहीं करते और कुछ में हानिकारक चीज़ें भी हो सकती हैं। कोई भी सप्लीमेंट डॉक्टर से पूछकर ही लें।
अश्वगंधा, शिलाजीत, सफ़ेद मूसली: क्या ये सच में काम करते हैं?

अश्वगंधा जैसी कुछ जड़ी-बूटियों पर कुछ छोटे अध्ययन हैं, पर सबूत सीमित हैं। ये इलाज का विकल्प नहीं हैं।
बड़ी दिक्कत मिलावट की है। सड़क किनारे या बिना भरोसे वाली दुकान से खरीदे प्रोडक्ट्स में आर्सेनिक (Arsenic) और सीसा (Lead) जैसे खतरनाक पदार्थ मिल सकते हैं। इसलिए डॉक्टर से पूछकर ही लें। नीम-हकीमों की दवाओं के खतरे पर पढ़ें: ग्रामीण भारत में झोलाछाप इलाज पर जनसत्ता में छपा लेख।
उत्तरी रेलवे केंद्रीय अस्पताल, दिल्ली के पूर्व डॉ. रवि गौड़ [MBBS, MS, McH Resident (यूरोलॉजी)] बताते हैं कि अश्वगंधा, शिलाजीत या सफ़ेद मूसली जैसे प्रोडक्ट्स के सेवन से लीवर कमजोर हो जाता है और कई अन्य गंभीर बीमारियां भी हो जाती हैं।

भारत के सबसे प्रसिद्ध हेपटोलॉजिस्ट्स (लिवर डॉक्टर) राजगिरि अस्पताल, कोच्चि (केरल) के डॉ. सायरिक अब्बी फिलिप्स कहते हैं कि नेचुरल टेस्टोस्टेरोन बूस्टर कह कर बेची जाने वाली दवाइयों में कोई परीक्षणों का प्रमाण नहीं है। अपने ट्वीट में वह मैन मैटर्स नाम की कंपनी द्वारा बेचे जा रहे टोस्टेरो कैप्सूल्स का ज़िक्र करते हुए यह बात लिखते हैं।
टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के नेचुरल तरीके: क्या करें?
अच्छी खबर यह है कि टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के सबसे असरदार तरीके घर पर ही शुरू हो सकते हैं।
स्वस्थ आहार अपनाएं

ज़्यादा चीनी और प्रोसेस्ड खाना कम करें। ऐसी डाइट से इंसुलिन रेज़िस्टेंस और मोटापा होता है, जो टेस्टोस्टेरोन घटा सकता है। इन चीज़ों को थाली में जगह दें:
- प्रोटीन: अंडे, दालें, चिकन, मछली और फलियां हार्मोन बनाने के लिए ज़रूरी अमीनो एसिड देते हैं।
- अच्छी वसा: मछली, अलसी और अखरोट में मिलने वाला ओमेगा-3 मदद करता है।
- जिंक: मेवे, बीज और साबुत अनाज जिंक के अच्छे स्रोत हैं।
- विटामिन डी: रोज़ थोड़ी देर धूप लें। सप्लीमेंट की ज़रूरत हो तो डॉक्टर से पूछें।
डाइट पर और जानकारी: लिंग खड़े होने में परेशानी? बदलें अपनी डाइट और शीघ्रपतन में फायदेमंद आहार।
नियमित व्यायाम करें

कार्डियो के साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (वज़न उठाने वाले व्यायाम) टेस्टोस्टेरोन के लिए खास फायदेमंद हैं। HIIT यानी थोड़ी देर तेज़ और फिर आराम वाले व्यायाम भी मदद कर सकते हैं।
योग और पेल्विक व्यायाम के लिए पढ़ें: शीघ्रपतन के लिए योगासन और कीगल एक्सरसाइज की पूरी विधि।
पूरी नींद लें

ज़्यादातर टेस्टोस्टेरोन नींद के दौरान बनता है। हर रात 7 से 9 घंटे की बिना रुकावट नींद का लक्ष्य रखें। सोने से पहले मोबाइल कम देखें।
तनाव कम करें

लगातार तनाव से कोर्टिसोल (cortisol) हार्मोन बढ़ता है, जो टेस्टोस्टेरोन को दबा सकता है। ध्यान, योग और गहरी सांस लेने को रोज़ की आदत बनाएं। पढ़ें: ज़्यादा टेंशन और शीघ्रपतन का रिश्ता।
पानी पीते रहें
शरीर के हर काम के लिए, हार्मोन बनाने समेत, पर्याप्त पानी ज़रूरी है।
वज़न कंट्रोल में रखें
पेट की ज़्यादा चर्बी एस्ट्रोजेन बढ़ा सकती है और टेस्टोस्टेरोन घटा सकती है। धीरे-धीरे वज़न कम करना हार्मोन के लिए सबसे असरदार कदमों में से एक है।
शराब से परहेज़ करें

ज़्यादा शराब टेस्टोस्टेरोन बनने पर बुरा असर डालती है और इरेक्शन बनाए रखना भी मुश्किल कर सकती है। पढ़ें: शराब से सेक्स लाइफ पर असर।
टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने में लोग कौन सी गलतियां करते हैं?
- बिना टेस्ट के "बूस्टर" शुरू करना: कई लोग विज्ञापन देखकर कैप्सूल ले लेते हैं, जबकि उनकी असली दिक्कत नींद, तनाव या डायबिटीज़ होती है।
- जिम के दोस्तों की सलाह पर स्टेरॉयड: कुछ हफ्तों की मसल्स के बदले लिवर, दिल और स्पर्म पर लंबा असर पड़ सकता है।
- एक-दो हफ्ते में नतीजा चाहना: लाइफस्टाइल बदलाव धीरे असर करते हैं। बीच में छोड़ देना सबसे आम गलती है।
- सिर्फ डाइट या सिर्फ जिम: खाना, व्यायाम, नींद और तनाव, चारों पर साथ काम करने से ही अच्छा फर्क आता है।
- रिपोर्ट खुद पढ़कर दवा लेना: एक रिपोर्ट से पूरी तस्वीर नहीं बनती। डॉक्टर लक्षण, उम्र और दूसरी जांचों के साथ इसे देखते हैं।
नतीजे कब तक दिखते हैं?
इसका कोई एक जवाब नहीं है। कई लोगों को नींद और एनर्जी में फर्क पहले दिखता है, जबकि वज़न, मसल्स और सेक्स की इच्छा में बदलाव धीरे आता है। आमतौर पर कुछ हफ्तों से कुछ महीनों तक नियमित रहना ज़रूरी है।
अगर लगातार कोशिश के बाद भी कोई सुधार न दिखे, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप कुछ गलत कर रहे हैं। हो सकता है वजह कोई और हो, जैसे थायरॉइड, डायबिटीज़ या कोई दवा। ऐसे में डॉक्टर से जांच कराना ही अगला सही कदम है।
डॉक्टर को कब दिखाएं?
- लाइफस्टाइल सुधारने के कुछ हफ्ते बाद भी थकान, कम इच्छा या इरेक्शन की दिक्कत बनी रहे
- आपको डायबिटीज़, थायरॉइड, BP या दिल की बीमारी है
- आप पहले से कोई हार्मोन, स्टेरॉयड या सप्लीमेंट ले रहे हैं
- बच्चे की प्लानिंग कर रहे हैं और सेक्स या स्पर्म को लेकर चिंता है
उम्र के साथ घटती इच्छा पर यह लेख भी मदद करेगा: बढ़ती उम्र और घटती सेक्स ड्राइव।
निष्कर्ष
टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के शॉर्टकट, जैसे स्टेरॉयड और बिना जांचे सप्लीमेंट, अक्सर बेअसर और नुकसानदेह होते हैं। संतुलित आहार, व्यायाम, नींद और कम तनाव सबसे भरोसेमंद रास्ता है।
शक हो तो टेस्ट कराएं और डॉक्टर से बात करें। Raaz पर MBBS, MD डॉक्टर फोन पर गोपनीय सलाह देते हैं; अब तक 50,000+ doctor consultations हो चुके हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
टेस्टोस्टेरोन नेचुरली बढ़ने में कितना समय लगता है?
यह हर व्यक्ति में अलग होता है। डाइट, व्यायाम, नींद और वज़न में सुधार का असर आमतौर पर कुछ हफ्तों से कुछ महीनों में दिखता है। नियमितता सबसे ज़रूरी है। अगर सुधार के बाद भी लक्षण बने रहें, तो ब्लड टेस्ट कराएं और डॉक्टर से मिलें, ताकि कोई और वजह छूट न जाए।
क्या अश्वगंधा और शिलाजीत टेस्टोस्टेरोन बढ़ाते हैं?
अश्वगंधा जैसी कुछ जड़ी-बूटियों पर छोटे अध्ययन हुए हैं, पर सबूत सीमित हैं। बाज़ार के कई प्रोडक्ट्स में मिलावट हो सकती है, जैसे सीसा या आर्सेनिक, जो लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इन्हें इलाज का विकल्प न मानें और डॉक्टर से पूछकर ही लें।
टेस्टोस्टेरोन टेस्ट कैसे और कब कराएं?
यह एक साधारण ब्लड टेस्ट है, जो आमतौर पर सुबह कराया जाता है क्योंकि तब हार्मोन का स्तर सबसे ज़्यादा होता है। अगर कई हफ्तों से सेक्स में रुचि कम है, इरेक्शन की दिक्कत है या बिना वजह थकान रहती है, तो डॉक्टर की सलाह से टेस्ट कराएं और रिपोर्ट उन्हें ही दिखाएं।
क्या टेस्टोस्टेरोन इंजेक्शन सुरक्षित है?
टेस्टोस्टेरोन थेरेपी सिर्फ तब दी जाती है जब जांच में कमी पक्की हो, और यह डॉक्टर की निगरानी में नियमित टेस्ट के साथ ही ली जाती है। बिना सलाह के लेने पर हार्मोन का संतुलन बिगड़ सकता है और स्पर्म कम हो सकते हैं। ज़्यादातर पुरुषों को इसकी ज़रूरत नहीं होती।
कम उम्र में टेस्टोस्टेरोन कम होने के क्या कारण हैं?
मोटापा, नींद की कमी, लगातार तनाव, ज़्यादा शराब या सिगरेट, व्यायाम की कमी और डायबिटीज़ या थायरॉइड जैसी बीमारियां कम उम्र में भी टेस्टोस्टेरोन घटा सकती हैं। सही जांच से असली कारण पता चलता है, और कारण के हिसाब से इलाज आसान हो जाता है।



