
योग शीघ्रपतन में मदद कर सकता है, पर अकेले इलाज नहीं है। अश्विनी मुद्रा, वज्रासन जैसे आसन pelvic मांसपेशियों को मज़बूत करते हैं, और प्राणायाम व ध्यान घबराहट कम करते हैं, जो जल्दी discharge की बड़ी वजह है। रोज़ नियम से कुछ हफ़्ते करें। नतीजे कारण और व्यक्ति पर निर्भर करते हैं।
योग के साथ शीघ्रपतन के लिए कीगल एक्सरसाइज भी बहुत काम की है। सिर्फ़ योग काफ़ी नहीं लग रहा? 2 मिनट का फ्री Men's Test लें और असली वजह जानें।
शीघ्रपतन क्या है?
शीघ्रपतन (premature ejaculation) में पुरुष सेक्स के दौरान अपनी इच्छा से पहले ही climax पर पहुंच जाता है और इसे रोक नहीं पाता। डॉक्टर इसे सिर्फ़ मिनटों से नहीं, बल्कि कंट्रोल की कमी और इससे होने वाली परेशानी से पहचानते हैं। इसकी वजहें मन और शरीर, दोनों से जुड़ी होती हैं: तनाव, घबराहट, thyroid, prostate या erection की कमज़ोरी। सभी इलाज विकल्प यहां पढ़ें: शीघ्रपतन का इलाज: पूरी गाइड।
शीघ्रपतन में योग कैसे काम करता है?
- मांसपेशियों पर कंट्रोल: कुछ आसन pelvic floor को मज़बूत करते हैं, जो स्खलन रोकने में मदद करता है।
- Blood flow: आसन pelvic हिस्से में खून का बहाव सुधारते हैं।
- तनाव कम: प्राणायाम और ध्यान घबराहट और performance anxiety घटाते हैं।
शीघ्रपतन के लिए 10 असरदार योगासन
वज्रासन (Vajrasana)

खाने के बाद घुटने मोड़कर एड़ियों पर सीधे बैठें। वज्रासन pelvic हिस्से में blood flow सुधारता है और वहां की मांसपेशियों को टोन करता है, जिससे स्खलन पर कंट्रोल में मदद मिल सकती है। 5 से 10 मिनट से शुरू करें।
अश्विनी मुद्रा (Ashwini Mudra)

इसमें गुदा द्वार की मांसपेशियों को सिकोड़ना और छोड़ना होता है। नियमित अभ्यास से pelvic floor, ख़ासकर pubococcygeus (PC) मांसपेशी मज़बूत होती है, जो स्खलन कंट्रोल करने में अहम है। यह kegel exercise जैसा ही काम करती है।
धनुरासन (Dhanurasana)

पेट के बल लेटकर टखने पकड़ें और शरीर को धनुष की तरह उठाएं। यह pelvic हिस्से में blood flow बढ़ाता है, पीठ मज़बूत करता है और लचीलापन बढ़ाता है। पीठ दर्द या हर्निया हो तो न करें।
भुजंगासन (Bhujangasana)

पेट के बल लेटकर हथेलियों के सहारे सीना उठाएं। यह रीढ़ को फैलाता है और pelvic हिस्से में blood flow बढ़ाने में मदद करता है।
पद्मासन (Padmasana)

यह बैठकर ध्यान करने की मुद्रा है। मन शांत होता है, घबराहट कम होती है और ध्यान बढ़ता है। Performance anxiety वाले पुरुषों के लिए यह ख़ास उपयोगी है।
पश्चिमोत्तानासन (Paschimottanasana)

बैठकर पैर सीधे रखें और आगे झुककर पंजे पकड़ने की कोशिश करें। यह शरीर के पिछले हिस्से को फैलाता है, pelvic तनाव घटाता है और मन शांत करता है।
सर्वांगासन (Sarvangasana)

कंधों के बल शरीर को ऊपर उठाने वाला आसन। यह तनाव कम करने में मदद करता है। गर्दन की समस्या, हाई BP या आंखों की बीमारी हो तो न करें, और शुरुआत किसी trained teacher के साथ करें।
हलासन (Halasana)

लेटकर पैरों को सिर के ऊपर से पीछे ले जाएं। यह रीढ़ और कमर के निचले हिस्से में खिंचाव लाता है और तनाव से राहत देता है। गर्दन या कमर की समस्या में न करें।
अर्ध मत्स्येन्द्रासन (Ardha Matsyendrasana)

बैठकर रीढ़ को एक तरफ़ मोड़ने वाला आसन। यह रीढ़ का लचीलापन बढ़ाता है, पाचन में मदद करता है और तनाव कम करता है।
शवासन (Shavasana)

योग के अंत में पीठ के बल पूरी तरह ढीले होकर लेटें। यह शरीर और मन को गहरा आराम देता है, जो स्खलन पर कंट्रोल के लिए ज़रूरी है।
शीघ्रपतन के लिए प्राणायाम: अनुलोम-विलोम और भ्रामरी
प्राणायाम यानी सांस के अभ्यास मन को शांत करते हैं। शीघ्रपतन में घबराहट बड़ी भूमिका निभाती है, इसलिए यह उपयोगी है। तनाव और PE के रिश्ते पर पढ़ें: तनाव और शीघ्रपतन का कनेक्शन।
- अनुलोम-विलोम: एक नथुने से सांस लें, दूसरे से छोड़ें, फिर उल्टा। 5 से 10 मिनट।
- भ्रामरी: सांस छोड़ते हुए मधुमक्खी जैसी गुनगुनाहट करें। मन जल्दी शांत होता है।
- कपालभाति: तेज़ी से सांस बाहर फेंकने का अभ्यास। हाई BP, दिल की बीमारी या हर्निया हो तो न करें।
योगासन कब और कितनी देर करें? असर कब दिखता है?
- रोज़ सुबह खाली पेट 15 से 20 मिनट काफ़ी है। वज्रासन खाने के बाद भी कर सकते हैं।
- आसान आसनों से शुरू करें, धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। दर्द हो तो रुक जाएं।
- असर आमतौर पर कुछ हफ़्तों के नियमित अभ्यास के बाद महसूस होता है। हर व्यक्ति में समय अलग होता है।
- योग के साथ kegel, अच्छी नींद और शीघ्रपतन के लिए सही diet जोड़ें।
योग कब काफ़ी नहीं है? डॉक्टर से कब मिलें
अगर कुछ हफ़्ते नियम से योग और kegel करने के बाद भी फ़र्क नहीं है, समस्या पहली बार से हमेशा रही है, पहले ठीक था और अचानक शुरू हुआ, या साथ में erection की कमज़ोरी या पेशाब में जलन है, तो डॉक्टर से मिलें। वजह thyroid, prostate या anxiety हो सकती है, जिसका इलाज अलग है। डॉक्टर से मिलने की झिझक पर पढ़ें: शीघ्रपतन में sexologist क्यों ज़रूरी है।
शीघ्रपतन को लेकर कई गलत बातें फैली हैं। सच जानें: शीघ्रपतन के मिथक और सच।
योग शुरू करने से पहले ज़रूरी सावधानियां
- खाली पेट करें, या खाने के 2 से 3 घंटे बाद। वज्रासन इसका अपवाद है।
- आसन में दर्द हो तो वहीं रुकें। ज़बरदस्ती खिंचाव न करें।
- हाई BP, दिल की बीमारी, गर्दन या कमर की समस्या, हर्निया या हाल की सर्जरी हो तो उल्टे आसन (सर्वांगासन, हलासन) और कपालभाति न करें, और पहले डॉक्टर से पूछें।
- शुरुआत में किसी trained योग teacher से सही तरीका सीख लें।
रोज़ का 20 मिनट का योग routine
- 2 मिनट: धीमी गहरी सांस से शुरुआत।
- 3 मिनट: अश्विनी मुद्रा (सिकोड़ें, छोड़ें)।
- 5 मिनट: भुजंगासन, धनुरासन और पश्चिमोत्तानासन, हर एक 2 से 3 बार।
- 5 मिनट: अनुलोम-विलोम और भ्रामरी।
- 5 मिनट: पद्मासन में ध्यान, फिर शवासन।
यह एक उदाहरण है। आसान आसनों से शुरू करें और जैसे-जैसे आराम आए, बाकी आसन जोड़ें।
Raaz पर इलाज कैसे शुरू होता है?
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निष्कर्ष
Pelvic मांसपेशियों पर काम करने वाले, blood flow बढ़ाने वाले और मन शांत करने वाले योगासन शीघ्रपतन में एक अच्छा कदम हैं। पर योग डॉक्टर के इलाज का विकल्प नहीं है। Raaz पर MBBS, MD sexual health डॉक्टरों से फ़ोन पर मुफ़्त और गोपनीय सलाह मिलती है, और दवा लिखी जाए तो गुप्त डिलीवरी होती है।
शुरुआत 2 मिनट के फ्री Men's Test से करें। यह आपकी समस्या और संभावित वजह समझने में मदद करता है, फिर डॉक्टर आपसे बात करके इलाज तय करते हैं।
शीघ्रपतन पर और पढ़ें:
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या योग से शीघ्रपतन हमेशा के लिए ठीक हो सकता है?
योग pelvic मांसपेशियां मज़बूत करके और तनाव घटाकर स्खलन पर कंट्रोल बढ़ाने में मदद कर सकता है, पर यह अकेला इलाज नहीं है और नतीजे हर व्यक्ति में अलग होते हैं। अगर वजह thyroid, prostate, erection की कमज़ोरी या lifelong PE है, तो डॉक्टर का इलाज ज़रूरी है। योग तब भी इलाज के साथ सपोर्ट करता है।
शीघ्रपतन के लिए दिन में कितनी देर योग करना चाहिए?
रोज़ सुबह खाली पेट 15 से 20 मिनट का अभ्यास काफ़ी है। आसान आसनों से शुरू करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। असर आमतौर पर कुछ हफ़्ते के नियमित अभ्यास के बाद महसूस होता है। बीच-बीच में छोड़ने से फ़ायदा कम मिलता है, इसलिए रोज़ की आदत बनाएं।
शीघ्रपतन के लिए सबसे अच्छा योगासन कौन सा है?
अश्विनी मुद्रा सीधे pelvic floor मांसपेशियों पर काम करती है, इसलिए इसे सबसे उपयोगी माना जाता है। वज्रासन भी pelvic हिस्से के लिए अच्छा है। घबराहट ज़्यादा हो तो पद्मासन में ध्यान, अनुलोम-विलोम और शवासन मदद करते हैं। कई आसनों को मिलाकर करना एक आसन से बेहतर है।
क्या योग और कीगल एक्सरसाइज साथ में कर सकते हैं?
हां, दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। योग पूरे शरीर, blood flow और तनाव पर काम करता है, जबकि kegel सीधे pelvic मांसपेशियों को मज़बूत करती है। दोनों को रोज़ के routine में साथ रखना अच्छा है। Kegel कहीं भी, बैठे-बैठे भी की जा सकती है।
अगर योग से कोई असर नहीं दिख रहा तो क्या करें?
कुछ हफ़्ते नियमित अभ्यास के बाद भी सुधार न हो, तो यह किसी शारीरिक या मानसिक वजह का संकेत हो सकता है, जैसे thyroid, prostate, erection की कमज़ोरी या anxiety। ऐसे में sexologist या urologist से मिलें। Raaz पर फ्री Men's Test लेकर घर बैठे डॉक्टर से बात कर सकते हैं।



