ग्रामीण भारत में यौन स्वास्थ्य की दशा और दिशा: गांव में गुप्त रोग का इलाज क्यों मुश्किल है
विश्व यौन स्वास्थ्य दिवस पर जनसत्ता में छपा राज़ के संस्थापकों का लेख: गांवों में यौन स्वास्थ्य की खामोश महामारी।

ग्रामीण भारत में गुप्त रोग (जैसे शीघ्रपतन और स्तंभन दोष) का इलाज मुश्किल है क्योंकि गांवों में डॉक्टर कम हैं, इस विषय पर शर्म है, और मरीज़ अक्सर झोलाछाप "डॉक्टरों" के पास चले जाते हैं। सही रास्ता है किसी रजिस्टर्ड MBBS, MD डॉक्टर से सलाह लेना; फोन पर गोपनीय परामर्श से यह गांव से भी संभव है।
WHO द्वारा 4 सितम्बर को विश्व यौन स्वास्थ्य दिवस और पूरे सितम्बर यौन स्वास्थ्य जागरूकता माह के तौर पर मनाया जाता है। इस अवसर पर हमारे संस्थापक आकाश कुमार और डॉ. हर्षित कुकरेजा का यह लेख हिंदी के प्रतिष्ठित अखबार जनसत्ता और अंग्रेजी में न्यूज़ 18 में छपा जहाँ से हम इसे साभार पुनः प्रकाशित कर रहे हैं।
आधी रात का समय और दिल्ली का एक सरकारी अस्पताल। आपातकालीन कक्ष में लगभग 28 साल का एक बेहोश मरीज स्ट्रेचर पर ज़ल्दी से ले आया जाता है। उसके चिंतित परिवारजन बताते हैं कि उसने टॉयलेट क्लीनर पीकर अपनी जान देने की कोशिश की। हमारी टीम फ़ौरन हरकत में आती है और सौभाग्यवश उसकी स्थिति को कण्ट्रोल में लाया जाता है। उसके होश में आने के बाद हमें पता चलता है कि उस युवा रिक्शा-चालक ने खुद को मारने की कोशिश बस इसलिए की थी क्योंकि वह स्तंभन दोष और शीघ्रपतन से पीड़ित था और इसका उसकी शादी पर काफी बुरा असर पड़ रहा था। हताशा में वह रोड किनारे बैठे कई नीम-हकीमों के चक्कर काट चूका था और लगभग ₹1 लाख खर्च करने के बाद भी उसे कोई समाधान नहीं मिला था। यह उस देश में जहाँ इस समस्या की जेनेरिक दवाएं आसानी से उपलब्ध हैं। और यह तो राष्ट्रीय राजधानी की बात है, देश के दूरवर्ती इलाकों में क्या होता है वह तो सोच के भी परे है।
गांव-देहात में गुप्त रोग का इलाज इतना मुश्किल क्यों है?
विश्व स्तर पर लगभग 4 में से 1 पुरुष कम से कम किसी न किसी रूप में यौन रोग से पीड़ित हैं। महिलाओं में भी ये संख्या लगभग इतनी ही है। इन विकृतियों का इलाज न हो पाने का सबसे बड़ा कारण इस विषय से जुड़ी वर्जनाएं हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन जैसी सरकारी स्कीम्स ने मातृ व शिशु मृत्यु दर और यौन संचारित रोगों (STDs) के इलाज की पहुंच बढ़ाने में मदद की है। पर नियमित यौन विकारों, जो एक-चौथाई से ज़्यादा जनसंख्या को प्रभावित करते हैं, उन पर ध्यान नहीं दिया गया है।
ग्रामीण भारत में डॉक्टर-मरीज़ अनुपात का बेहद खराब होना इस परेशानी का सिर्फ एक पहलू है। छोटे शहरों और गांवों में, जहाँ सब एक-दूसरे को जानते हैं, संकोच और बढ़ जाता है।
बिहार में हमारे और हमारे सहयोगियों द्वारा किए जा रहे एक अध्ययन के आंकड़ों से पता चलता है कि इस प्रकार के यौन रोगों के लिए डॉक्टर से परामर्श लेने वाले रोगियों की संख्या लगभग नगण्य है। मरीज़ डॉक्टर तक पहुँचते ही नहीं हैं।
झोलाछाप डॉक्टर और नीम-हकीम से क्या खतरा है?

जानकारी की कमी और डॉक्टर के पास जाने के संकोच का फायदा नीम-हकीम और झोलाछाप डॉक्टर उठाते हैं। ये एक जगह दुकान नहीं लगाते, बस हफ्ते में एक-दो बार बैठते हैं। स्थानीय न होने की वजह से मरीज़ों को बात फैलने का डर कम लगता है और वे इनसे खुलकर बात कर लेते हैं।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अनुसार देश में कम से कम 10 लाख झोलाछाप डॉक्टर काम कर रहे हैं, जिनमें से कई यौन रोग ठीक करने का दावा करते हैं। वे अक्सर खुद से तैयार की गई दवाएं देते हैं, जो काम नहीं करतीं और कई मामलों में घातक भी साबित होती हैं। बिना डॉक्टर की पर्ची के मिलने वाली ऐसी दवाओं का भी यही सच है।
2022 के नीति आयोग के एक अध्ययन ने बिना पर्ची की और नीम-हकीमों द्वारा खुद तैयार की गई दवाओं को देश में सीसा (लेड) विषाक्तता के प्रमुख कारणों में गिना है, और हिंदी पट्टी के राज्यों में स्थिति ज़्यादा चिंताजनक बताई है।
एक और समस्या यह है कि भारत में यौन चिकित्सा को अलग स्पेशियलिटी के रूप में मान्यता नहीं मिली है। यह एंड्रोलॉजी, यूरोलॉजी, डर्मेटोलॉजी और साइकाइट्री के 4 विभागों में बिखरी हुई है। हमारा सुझाव है कि नेशनल मेडिकल कमीशन MBBS के बाद यौन चिकित्सा में 6 महीने या एक साल का फ़ेलोशिप प्रोग्राम तैयार कर उसे मान्यता दे।
इस समस्या का हल क्या हो सकता है?
हम रोहिणी नीलेकणी के सुझाए समाज, सरकार और बाज़ार के बीच की परस्परता वाले फ्रेमवर्क पर आधारित दृष्टिकोण की अनुशंसा करते हैं। यौन रोगों के बड़े बोझ को देखते हुए इसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में शामिल किया जा सकता है। पर यह तभी हो पाएगा जब सरकार गांवों में तैनात स्वास्थ्यकर्मियों को इसका विशेष प्रशिक्षण दे।
लंबे समय का समाधान है लोगों तक यौन स्वास्थ्य की सही जानकारी पहुंचाना। स्कूलों में बेसिक जानकारी और ओएमजी 2 जैसी फिल्में इसमें मदद कर सकती हैं। ग्रामीण भारत को शर्मिंदगी से घिरी इस खामोश महामारी के समाधान की ज़रूरत है।
गुप्त रोग की आम समस्याएं कौन सी हैं?
गांव-देहात में "गुप्त रोग" शब्द कई अलग-अलग समस्याओं के लिए इस्तेमाल होता है। सही इलाज के लिए यह जानना ज़रूरी है कि असली दिक्कत क्या है:
- शीघ्रपतन: ज़्यादातर बार बहुत जल्दी डिस्चार्ज होना और उसे रोक न पाना।
- स्तंभन दोष (इरेक्शन प्रॉब्लम): इरेक्शन न होना या टिक न पाना।
- कम इच्छा: सेक्स में रुचि लगातार कम रहना।
- यौन संक्रमण (STI): जलन, घाव, खुजली या असामान्य डिस्चार्ज।
- धात या स्वप्नदोष की चिंता: ज़्यादातर सामान्य प्रक्रिया, पर अक्सर डर का कारण।
इनमें से कई समस्याओं के पीछे डायबिटीज़, BP, तनाव, शराब, तंबाकू या गुटखा जैसी वजहें होती हैं। सही कारण पहचानकर इलाज संभव है; नतीजे कारण और व्यक्ति पर निर्भर करते हैं।
नीम-हकीम को कैसे पहचानें?
- बोर्ड पर "पक्का इलाज" या "एक खुराक में जड़ से खत्म" जैसे वादे।
- असली MBBS या MD डिग्री नहीं, या अजीब नाम वाली डिग्रियां।
- बिना जांच, सिर्फ बात सुनकर "पुड़िया" या "भस्म" देना।
- मरीज़ को डराना कि "धात" या स्वप्नदोष से ताकत खत्म हो रही है।
- महंगे "कोर्स" और बार-बार नई दवा खरीदने का दबाव।
- हफ्ते में एक-दो दिन आना और फिर गायब हो जाना।
ऐसे किसी भी संकेत पर सावधान हो जाएं। पैसे से ज़्यादा आपकी सेहत दांव पर होती है, खासकर लिवर और किडनी।
शर्म छोड़कर डॉक्टर से कैसे बात करें?
कई मरीज़ सालों तक चुप रहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि डॉक्टर उन्हें जज करेंगे। असल में सेक्स से जुड़ी समस्याएं डॉक्टर रोज़ देखते हैं, और ये उतनी ही सामान्य हैं जितना बुखार या पेट दर्द।
- अपनी समस्या सीधे शब्दों में बताएं: कब से है, कितनी बार होती है।
- कोई बीमारी (डायबिटीज़, BP) या दवा हो तो ज़रूर बताएं।
- पहले से ली गई देसी दवाओं के बारे में भी बताएं, यह ज़रूरी है।
- कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू न करें।
बिहार जैसे राज्यों में हमने देखा है कि मरीज़ अक्सर पहले दोस्तों, केमिस्ट या सड़क किनारे बैठे "विशेषज्ञ" से सलाह लेते हैं, और डॉक्टर तक तब पहुंचते हैं जब बहुत पैसा और समय खर्च हो चुका होता है। इस देरी में कई बार डायबिटीज़ या BP जैसी असली बीमारी भी पकड़ में नहीं आती, जो इरेक्शन की दिक्कत के पीछे छिपी होती है। इसलिए जल्दी और सही डॉक्टर तक पहुंचना सिर्फ यौन स्वास्थ्य नहीं, पूरे शरीर की सेहत के लिए ज़रूरी है।
क्या फोन पर डॉक्टर से सलाह गांव में समाधान है?
फोन पर डॉक्टर से परामर्श मरीज़ को गोपनीयता देता है और शर्म की दीवार को काफी हद तक तोड़ सकता है। टेलीकंसल्टेशन और ई-फार्मेसी पर बहुत कड़े नियम ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच पर उल्टा असर डालेंगे। इसलिए सरकार को ऐसी पहलों को रोकने के बजाय बढ़ावा देना चाहिए।
एक बार जब पहुंच बढ़ाने की पहल नतीजे दिखाने लगे, तब झोलाछाप डॉक्टरों और नीम-हकीमों पर कार्रवाई भी ज़रूरी है, क्योंकि वे लोगों की असुरक्षा का फायदा उठाकर उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं।
गांव-देहात में गुप्त रोग का सही इलाज: क्या करें?
- पहले समझें कि समस्या क्या है और उसकी वजह क्या हो सकती है। पढ़ें: गुप्त रोग के कारण और इलाज की पूरी जानकारी।
- सिर्फ रजिस्टर्ड MBBS, MD डॉक्टर से सलाह लें। बोर्ड पर लिखी डिग्री ज़रूर जांचें।
- सड़क किनारे, इश्तेहार या बिना पर्ची वाली "ताकत की दवा" न लें।
- डायबिटीज़, BP या दिल की बीमारी हो तो डॉक्टर को ज़रूर बताएं, ये भी यौन समस्या की वजह हो सकती हैं।
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राज़ आपकी कैसे मदद कर सकता है?

घर बैठे निःशुल्क विशेषज्ञ परामर्श
राज़ आपको अनुभवी MBBS, MD यौन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर से सीधे फोन पर जोड़ता है। ये डॉक्टर शीघ्रपतन सहित गुप्त रोगों के इलाज में अनुभवी हैं।
व्यक्ति अनुसार ट्रीटमेंट प्लान
डॉक्टर ज़रूरत के हिसाब से व्यवहार तकनीक, दवा या दोनों की सलाह देते हैं।
मॉनिटरिंग और निरंतर सपोर्ट
नियमित फॉलो-अप से प्रगति ट्रैक होती है और ज़रूरत पड़ने पर प्लान बदला जाता है।
गोपनीय और सुविधाजनक

आपकी बातचीत और जानकारी गोपनीय रहती है, और दवा घर तक गुप्त रूप से पहुंचती है।
गुप्त रोग से जुड़े और लेख
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
गांव में गुप्त रोग का सही डॉक्टर कैसे ढूंढें?
सबसे भरोसेमंद तरीका है किसी रजिस्टर्ड MBBS या MD डॉक्टर से सलाह लेना। बोर्ड पर लिखी डिग्री जांचें और इश्तेहार वाले "गुप्त रोग विशेषज्ञों" से बचें। अगर पास में ऐसा डॉक्टर नहीं है, तो फोन पर गोपनीय परामर्श एक अच्छा विकल्प है, जिसमें दवा भी घर तक पहुंच सकती है।
झोलाछाप डॉक्टर की दवा लेना खतरनाक क्यों है?
झोलाछाप डॉक्टर अक्सर बिना जांच के खुद बनाई दवाएं देते हैं, जो असर नहीं करतीं और कई बार नुकसान पहुंचाती हैं। नीति आयोग के एक अध्ययन ने ऐसी दवाओं को सीसा विषाक्तता के प्रमुख कारणों में गिना है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अनुसार देश में कम से कम 10 लाख झोलाछाप डॉक्टर काम कर रहे हैं।
क्या फोन पर डॉक्टर से बात करना गोपनीय है?
हां, राज़ पर परामर्श निजी रहता है और आपकी जानकारी गोपनीय रखी जाती है। किसी पड़ोसी या रिश्तेदार को इसकी जानकारी नहीं मिलती। दवा भी बिना किसी पहचान वाली पैकिंग में घर तक पहुंचती है, इसलिए गांव या छोटे शहर में भी मरीज़ बिना संकोच बात कर सकते हैं।
गुप्त रोग का इलाज शुरू करने का पहला कदम क्या है?
पहला कदम है समस्या और उसकी वजह को समझना, क्योंकि शीघ्रपतन या इरेक्शन की दिक्कत के पीछे तनाव, डायबिटीज़, BP या लाइफस्टाइल जैसी अलग-अलग वजहें हो सकती हैं। राज़ का फ्री Men's Test 2 मिनट में आपकी समस्या और संभावित कारण समझने में मदद करता है, फिर डॉक्टर सलाह देते हैं।
क्या यह सेवा सिर्फ शहर वालों के लिए है?
नहीं, फोन और इंटरनेट की सुविधा हो तो गांव, कस्बे या शहर, कहीं से भी मरीज़ राज़ के डॉक्टरों से बात कर सकता है। इसी कमी को दूर करना इस लेख का मुख्य विचार है: शर्म और दूरी की वजह से किसी को भी सही इलाज से वंचित नहीं रहना चाहिए।


